महत्वपूर्ण तथ्य

क्या आपकी कुंडली में लक्ष्मी योग है?

ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि में धन वैभव और सुख के लिए कुण्डली में मौजूद धनदायक योग या लक्ष्मी योग काफी महत्वपूर्ण होते हैं. जन्म कुण्डली एवं चंद्र कुंडली में विशेष .........

कालसर्प शान्ति के लिये नाग पंचमी पूजा

नाग पंचमी श्रवण मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जायेगा, इस वर्ष यह पर्व 14 अगस्त, शनिवार, हस्त नक्षत्र में रहेगा. यह श्रद्धा व विश्वास का पर्व है ! ..........

शनि साढेसाती के तीन चरण

शनि साढेसाती (Shani Sade Sati) में शनि तीन राशियों पर गोचर करते है. तीन राशियों पर शनि के गोचर को साढेसाती (Shani Sade Sati) के तीन चरण के नाम से भी जाना जाता है. अलग- अलग ...........

विवाह से पूर्व प्रश्न कुण्डली से जानिए भावी दम्पत्ति का स्वभाव

विवाह के बाद पति पत्नी में उनके व्यवहार और स्वभाव को लेकर बात बहुत आगे बढ़ जाती है. प्रश्न कुण्डली से लड़का लड़की .........

ज्योतिष परामर्श

Latest Posts

  • कालसर्प शान्ति के लिये नाग पंचमी पूजा
    September 26, 2019 No Comments नाग पंचमी की विशेषता - Speciality of Nag Panchmi ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता है. पूर्ण श्रवण मास में नाग पंचमी होने के कारण इस मास में धरती खोदने का कार्य नहीं किया जाता है. इसलिये इस दिन भूमि में हल चलाना, नींव खोदना शुभ नहीं माना जाता है. भूमि

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  • उत्तर के दोष धन हानि व् तनाव के कारण
    September 26, 2019 No Comments

    रसोई के लिए कहा गया की यह दक्षिण पूर्व, दक्षिण या पूर्व या उतर पश्चिम में बनाना ही उतम हैं. परन्तु क्योंकि सीढ़ी या रसोई में से एक को ही अभी वह दक्षिण की ओर कर सकते थे तो उनको रसोई के अन्दर गैस को दक्षिण पूर्व, पूर्व मुखी तथा उतर में वाशिंग एरिया बनाने की सलाह दी गई.

  • मंगल की शान्ति के उपाय
    September 26, 2019 No Comments जब किसी व्यक्ति का स्वयं का जन्म या फिर उसकी संतान का जन्म अशुभ योगों में अर्थात गण्डमूळ, गण्डान्त, अभुक्तमूल आदि अशुभ नक्षत्रों (Gandmoola, Gandant, Abhuktamoola as inauspicious Nakshatras at the time of birth) में हुआ हों तो व्यक्ति के कुशलता व आयु वृ्द्धि के लिये शान्ति उपाय किये जाते है. व्यक्ति के जीवन की

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एक मुखी रुद्राक्ष

Purchase Now यह रुद्राक्ष साक्षात भगवान शंकर का स्वरूप है। इससे भक्ति व मुक्ति दोनों की प्राप्ति होती है। धारक प्रवित्र व पापमुक्त होकर परब्रह्म की प्राप्ति करता है। यह अत्यन्त दुर्लभ रुद्राक्ष है एवं अनेक कार्यो में सफलता प्रदान करता है। शिव उपाच- श्रृणु षणमुख तत्त्वेन वक्त्रे वक्त्रे तथा फलम्।