अष्ट मुखी रुद्राक्ष

अष्टमुखी रुद्राक्ष को विनायक का रूप माना गया है इसके देवता वटुक भैरव हैं इससे धारक की विघ्न बाधाएं दूर होती है। आठों दिशाओं में विजय प्राप्त होती है व कोर्ट कचहरी के मामलों में सफलता मिलती है

अष्टवक्त्रो महासेन साक्षाद्देवो विनायकः।।

हे महासेन ! अष्टमुखी रुद्राख साक्षात् गणेशजी का स्वरूप है तथा यह अष्टसिद्धि प्रदाता है। मानकूटादिक और परस्त्रीजन्य जो पाप है वे अष्टमुखी रुद्राक्ष धारण करने से कार्य सिद्धि होते हैं। यह रुद्राक्ष गणेश रुद्राक्ष के नाम से जाना जाता है तथा गणेश विषयक अनुष्ठानों शीघ्र सफलता प्रदान करता है। यह रुद्राक्ष मीन लग्न के जातकों के लिए अत्यन्त लाभकारी माना गया है

उपयोग से लाभ

इस रुद्राक्ष की माला को जप करने से गणेश की सिद्धि शीघ्र ही प्राप्त होती है तथा आठो दिशाओं में विजय पटाका लहराता है।
यह रुद्राक्ष धारण से कोर्ट कचहरी के मामलों में सफलता मिलती है साथ ही दुर्घटनाओं एवं प्रबल शत्रुओं से रक्षा होती है तथा भूत, प्रेत, जिन्न, पिशाच आदि बांधाओं से रक्षा होती है
यह रुद्राक्ष धारण करने से गुरु पत्नी एवं दुष्ट स्त्री से किये गये सहवास का पाप नष्ट होता है।
इस रुद्राक्ष को धारण करने से समस्त बांधायें नष्ट होती हैं तथा धारक को परमपद की प्राप्ति होती है।