एक मुखी रुद्राक्ष

एक मुखी रुद्राक्ष

यह रुद्राक्ष साक्षात भगवान शंकर का स्वरूप है। इससे भक्ति व मुक्ति दोनों की प्राप्ति होती है। धारक प्रवित्र व पापमुक्त होकर परब्रह्म की प्राप्ति करता है। यह अत्यन्त दुर्लभ रुद्राक्ष है एवं अनेक कार्यो में सफलता प्रदान करता है।
शिव उपाच- श्रृणु षणमुख तत्त्वेन वक्त्रे वक्त्रे तथा फलम्।

एकवक्त्रः शिवः साक्षाद्ब्रह्राहत्यां व्यपोहति।।

शिवजी स्वयं कार्तिकस्वामी से कह रहे हैं-हे षड़मुख ! कितने मुख वाला रुद्राक्ष किस प्रकार के फल को देने वाला है उसे ध्यान से सुनो ! एकमुखी रुद्राक्ष साक्षात् मेरा ही स्वरूप है तथा यह ब्रह्महत्या व पाप को दूर करने वाला है।

एकमुखी रुद्राख सर्वसिद्धि प्रदाता रुद्राक्ष कहा गया है। यह सात्त्विक शक्ति में वृद्धि करने वाला, मोक्ष प्रदाता रुद्राक्ष है। जिसके घर में यह रुद्राक्ष होता है वहां लक्ष्मी का स्थाई वास हो जाता है तथा उसका घर धन-धान्य, वैभव, प्रतिष्ठा और दैवीय कृपा से भर जाता है। संक्षेप में यह धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को देने वाला चतुर्वर्ग प्रदाता रुद्राक्ष है।

उपयोग से लाभ

जो मनुष्य उच्छिष्ट अथवा अपवित्र रहते हैं अथवा बुरे कर्म करने वाले होते हैं। वे इस रुद्राक्ष को स्पर्श करने से सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं।
इस रुद्राक्ष को कंण्ठ में धारण करने वाला महत्वाकांक्षी होता है और उसके सभी कार्य सफल होते हैं। इसे सिर के ऊपर रखकर स्नान करने से अनेक गंगा स्नान का फल प्राप्त होता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से सभी देवता और देवियां स्वतः ही प्रसन्न हो जाते हैं। तथा इच्छित फल प्रदान करते हैं।