कुबेर यंत्र

स्वर्ण लाभ, रत्न लाभ, गड़े हुए धन का लाभ एवं पैतृक सम्पत्ती का लाभ चाहने वाले लोगों के लिए कुबेर यंत्र अत्यन्त सफलता दायक है। इस यंत्र द्वारा अनेकानेक रास्ते से धन का आवागमन होता है एवं धन संचय होता है। इस यंत्र की अचल प्रतिष्ठा होती है।

’शिव पुराण’ के अनुसार यक्षराज कुबेर अलकावती नामक नगरी के राजा थे। ब्रह्माण्ड पुराण के अनुसार मेरु पर्वत की चोटी मंदार पर ’चैत्ररथ’ नामक एक दिव्य बगीचा है, जहाँ कुबेर आराम करते हैं। अनेक प्रकार के किन्न-गन्धर्व व अप्सरायें यहाँ कुबेर आराम करते हैं। अनेक प्रकार के किन्नर-गन्धर्व व अप्सरायें यहाँ कुबेर आराम करते हैं अनेक प्रकार के किन्नर-गन्धर्व व अप्सरायें यहाँ कुबेर का नित्य पूजन करती है। जिस जगह पर कुबेर ने तपस्या की वह स्थल नर्मदा नदी एवं कावेरी का संगम स्थल था। वह स्थल आज भी ’कौबेर तीर्थ’ के नाम से पूजा जाता है।

यंत्र का उपयोग

विल्व-वृक्ष के नीचे बैठकर यंत्र को सम्मुख रखकर कुबेर मंत्र को शुद्धता पूर्वक जप करने से यंत्र सिद्ध होता है तथा यंत्र सिद्ध होने के पश्चात् इसे गल्ले, तिजोरी या सेफल में स्थापित किया जता है। इसके स्थापना के पश्चात् दरिद्रता का नाश होकर, प्रचुर धन व यश की प्राप्ति होती देखी गई है। यह अनुभूत परीक्षित प्रयोग है।