चार मुखी रुद्राक्ष

ब्रह्मा जी का स्वरूप माना गया है यह चारों वेदों का रूप है। मनुष्य को धर्म, अर्थ काम और मोक्ष को प्रदान करने वाला है इसे धारण करने से मानसिक रोग दूर होते है। तथा मन में सात्विक विचार उत्पन्न होते हैं एवं धर्म में आस्था बढ़ती है।

चतुर्वक्त्रः स्वयं ब्रह्मा नरहत्यां व्यपोहति।।

चतुर्मुखी रुद्राख स्वयं ब्रह्मा है तथा यह नर-हत्या इत्यादि जघन्य पाप को दूरी करने वाला है। यह अभीष्ट सिद्धियों को देने वाला परमगुणकारी रुद्राक्ष है। अनुकूल विद्या को प्राप्त करने हेतु इससे सहायता मिलती है तथा सद्गुरु की प्राप्ति होती है। इसको धारण करने से मंदबुद्धि वालों की भी बुद्धि कुशाग्र हो जाती है।

इस रुद्राक्ष मेष और सिंह लग्न से जातकों के लिए अत्यन्त लाभकारी माना गाया है। ऐसे जातकों के लिए यह पूरी तरह लाभ प्रदान करता है।

उपयोग से लाभ

यह रुद्राक्ष डा. इंजीनियर, अध्यापक आदि को भौतिक कार्य करने में सहायता प्रदान करता है।
इसको धारण करने से व्यर्थ की चिंता नष्ट होती हैं। तथा धर्म की ओर अग्रसर करता है और सफलता देता है।
ऊदर तथा गर्भाशय से रक्तचाप तथा हृदय रोग से सम्बन्धित अनेक बिमारियों के लिए चारमुखी रुद्राक्ष के कुछ दाने मिट्टी की हाँडी में पानी डालकर भिगोये रखें प्रत्येक 24 घंटे पश्चात यह रुद्राक्ष का जल खाली पेट प्रातःकाल पीते रहें निश्चित लाभ होगा।
चारमुखी रुद्राक्ष धारण के पश्चात् सिद्धि आदि करने पर शीघ्र सफलता मिलती है।