इंद्र को इसका प्रधान देवता मानते है यह रुद्राक्ष ग्यारह रुद्रों की प्रतिमा होता है इसके धारण करने से सदा सुख में वृद्धि होती है।
एकादशास्यो रुद्रा हि रुद्राश्चैकादश समृताः।
शिखायां धारयेन्नित्यं तस्य पुण्यफलं श्रृणु।।
हे स्कंद ! एकादशमुखी रुद्राक्ष एकादश रुद्रों का ही स्वरूप है। इस रुद्राक्ष को साक्षात् शिव का प्रसाद समझकर जो व्यक्ति मस्तक में धारण करके या शिखा स्थान में बांधकर रखते हैं उनको हजार अश्वमेध-यज्ञ करने का फल, सौ वाजपेय-यज्ञ करने का फल और चंद्र ग्रहण में दान करने से जो फल प्राप्त होता है वह फल इस रुद्राक्ष को विधिवत पूजन कर धारण करने से होता है।
उपयोग से लाभ
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष एकादशी में सिखा या सिर पर धारण करने से विष्णु भगवान प्रसन्न होते हैं और अश्वमेघ यज्ञ का फल प्रदान करते हैं। वन्ध्या स्त्री को विश्वास पूर्वक धारण करने पर सन्तानवति होने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से महारुद्र, वीरभद्र प्रसन्न होते हैं तथा इच्छा पूर्ति करते हैं।
मस्तिष्क सम्बन्धी विकारों से पीड़ित व्यक्तियों तथा मस्तिष्कीय कार्य करने वाले लोगां को शक्ति प्राप्त होती है।