सात आवरण, पृथ्वी, जल, वायु, आकाश, अग्नि व अन्धकार का स्वरूप माना गया है। इसके देवता सप्तऋषि हैं इससे लक्ष्मी प्राप्ति होती है तथा धन संपत्ति कीर्ति प्राप्त होती है।
सप्तवक्त्रो महासेन अनंतो नाम नामतः।
र्णस्तेयं गोवधंच कृत्वा पापशतानि च।।
हे महासेन ! सप्तमुखी रुद्राक्ष ’अनन्त’ नाम करके विख्यात है। जिस मनुष्य ने सोने की चोरी की है, गोवध किए हैं अथवा अनेक प्रकार के सैकड़ों पाप किए हैं उनको यह पवित्र बना देता है। यह रुद्राख अभीष्ट सिद्धियों को देने वाला, पाप नाशक एवं भूमि प्रदाता है। प्राचीन काल में ऋषियों को यह अत्यन्त प्रिय था और ऋषिगण प्रायः इसका उपयोग अत्यधिक किया करते थे। यह रुद्राक्ष वृष, कन्या, कुम्भ लग्न के जातक को अत्यन्त लाभ प्रदान करता है।
उपयोग से लाभ
इसे धारण करने से अनेक विपरीत लिंग के लोग आकर्षित होते हैं तथा उनका सुख प्राप्त होता है।
यह रुद्राक्ष धनागमन एवं व्यापार उन्नति में अत्यन्त सहायक माना गया है
सातमुखी रुद्राक्ष धारण करने से कामवासना की वृद्धि होती है तथा पौरुष को बढ़ाता है।
सातमुखी रुद्राक्ष धारण करने से पुरुषों को स्त्री सुख प्राप्त होता है तथा परस्पर सहयोग एवं सम्मान तथा प्रेम की वृद्धि होती है।