यह रुद्राक्ष नव शक्ति से संपन्न है इसके देवता भगवती दुर्गा हैं इससे धारक को नौ तीर्थो-पशुपति, मुक्तिनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ, जगन्नाथ, सोमनाथ, पारसनाथ, वैद्यनाथ आदि तीर्थो का फल प्राप्त होता है इसे धर्मराज का स्वरूप माना गया है। यह धारण करने से वीरता साहस कर्मठता में वृद्धि होती है।
नवमं भैरवंनाम कपिलवर्णं मुक्तिदं स्मृतम्।
धारणाद्वामहस्ते तु मम तुल्यो भवेन्न्र।।
नवमुख रुद्राख का भेरव नाम है, कपिलवर्ण है जो मनुष्य अपनी वाम भुजा में इसको धारण करते हैं वे मेरे तुल्य हो जाते हैं वस्तुतः ’भैरवनायक’ नवमुखी रुद्राक्ष नव प्रकार की निधियों का प्रदाता है। यह सभी अभिलक्षित अभीष्ट वस्तुओं का प्रदाता है। यह नवुदर्गा, नवग्रह, नव-नाथों एवं नवधा भक्ति का प्रतीत है। यह सभी अभिलषित अभीष्ट वस्तुओं का प्रदाता है। नवमुखी रुद्राक्ष लक्ष-हजार-करोड़ पापों को नाश करने वाला कहा गया है। यह रुद्राक्ष मेष, वृश्चिक एवं धन लग्न वालों के लिए अत्यधिक उपयोगी एवं सफलता दायिक माना गया है।
उपयोग से लाभ
नौमुखी रुद्राक्ष धारण करने से तांत्रिक सिद्धियां शीघ्र प्राप्त होती हैं तथा तंत्र क्षेत्र का ज्ञान बढ़ता है।
नौमुखी रुद्राक्ष को बांयी भुजा पर धारण करने से व्यक्ति को भैरवसिद्धि प्राप्त होती है तथा वह व्यक्ति तन, मन से सदा पवित्र रहता है।
नौमुखी रुद्राक्ष की माला पर नवरात्रि में नवर्णमंत्र का जप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है एवं मां भगवती की कृपा प्राप्त होती है। इसी माला पर शुभ मुहूर्त में भैरवमंत्र का जप करने से भैरव कृपा प्राप्त होती है।