तीन मुखी रुद्राक्ष

त्रिवक्त्रोग्निश्च विज्ञेयः स्त्रीहत्यां च व्यपोहति।।
त्रिमुखी रुद्राक्ष साक्षात् का स्वरूप है। यह स्त्री हत्या इत्यादि पापों को दूर करने वाला है। इसके पहनने से शीत ज्वर ठीक हो जाता है। मेष, सिंह व धनु लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए यह रुद्राक्ष सर्वाधिक उपयोगी हैं इसके धारण से विद्य़ाओं की प्राप्ति होती हैं मंदबुद्धि बालकों के लिए इसे धारण करना नितांत आवश्यक है। मंद-रक्त चाप के निराकरण हेतु इसे पहना जा सकता है।

यह सत्व, रज और तम तीनों त्रिगुणात्मक शक्तियों का स्वरूप माना गया है। इच्छा ज्ञान और क्रिया का शक्तिमय रूप होता है यह रुद्राक्ष अग्नि रूप भी माना गया है यह ब्रह्मशक्ति व खुशहाली दिलाने वाला रुद्राक्ष है।

उपयोग से लाभ

तीनमुखी रुद्राक्ष के कुछ दाने ताँबे के बर्तन में पानी डालकर भिगाये रखें। प्रत्येक 24 घंटे के अंतराल से यह रुद्राक्ष जल खाली पेट प्रातः पीने से विभिन्न चर्म रोगों से मुक्ति में सहायता प्राप्त होती है।

इस रुद्राक्ष को पत्थर पर घिस कर नाभि पर लगाने से धातु रोग में लाभ होता है
तीन मुखी रुद्राक्ष की माला को जप करने से यश प्राप्त होता है एवं कामनायें सिद्ध होती हैं।

 

 

जो मनुष्य उच्छिष्ट अथवा अपवित्र रहते हैं अथवा बुरे कर्म करने वाले होते हैं। वे इस रुद्राक्ष को धारण से करने से सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं।

  त्रिवक्त्रोग्निश्च विज्ञेयः स्त्रीहत्यां च व्यपोहति।।त्रिमुखी रुद्राक्ष साक्षात् का स्वरूप है। यह स्त्री हत्या इत्यादि पापों को दूर करने वाला है। इसके पहनने से शीत ज्वर ठीक हो जाता है। मेष, सिंह व धनु लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए यह रुद्राक्ष सर्वाधिक उपयोगी हैं इसके धारण से विद्य़ाओं की प्राप्ति होती हैं मंदबुद्धि बालकों के लिए इसे धारण करना नितांत आवश्यक है। मंद-रक्त चाप के निराकरण हेतु इसे पहना जा सकता है।

यह सत्व, रज और तम तीनों त्रिगुणात्मक शक्तियों का स्वरूप माना गया है। इच्छा ज्ञान और क्रिया का शक्तिमय रूप होता है यह रुद्राक्ष अग्नि रूप भी माना गया है यह ब्रह्मशक्ति व खुशहाली दिलाने वाला रुद्राक्ष है।

उपयोग से लाभ

तीनमुखी रुद्राक्ष के कुछ दाने ताँबे के बर्तन में पानी डालकर भिगाये रखें। प्रत्येक 24 घंटे के अंतराल से यह रुद्राक्ष जल खाली पेट प्रातः पीने से विभिन्न चर्म रोगों से मुक्ति में सहायता प्राप्त होती है।

इस रुद्राक्ष को पत्थर पर घिस कर नाभि पर लगाने से धातु रोग में लाभ होता है

तीन मुखी रुद्राक्ष की माला को जप करने से यश प्राप्त होता है एवं कामनायें सिद्ध होती हैं।

जो मनुष्य उच्छिष्ट अथवा अपवित्र रहते हैं अथवा बुरे कर्म करने वाले होते हैं। वे इस रुद्राक्ष को धारण से करने से सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं।