दो मुखी रुद्राक्ष

द्विमुखी रुद्राक्ष शंकर व पार्वती के रूप में माना गया है अर्थात अर्धनारीश्वर रूप है। इसके उपयोग से धारक के सभी मनोरथ सिद्ध होते है। कार्य तथा व्यापार में सफलता मिलती है यह मोक्ष और वैभव का दाता है।
द्विवक्त्रो देवदेवेशो गोवधं नाशयेदृध्रवम् ||

द्विमुखी रुद्राक्ष साक्षात् देवदेवश का स्वरूप है। यह गोवध करने के पापों से छुड़ाने वाला है। इसको धारण करने वाले व्यक्ति की अनेक व्याधियां स्वतः ही शांत हो जाती हैं। यह रुदा्रक्ष भी चतुवर्ग सिद्धि प्रदाता है।
आंवले के फल के बराबर दो मुखी रुद्राख समस्त अनिष्टों का नाश करने वाला तथा श्रेष्ठ माना गया है। इस रुद्राक्ष में पूर्णरूप से अंतर्गभित विद्युत तरंगे होती हैं। इन्हीं इसकी शक्ति का पता चलता है। दोमुखी रुदा्रक्ष के धारण करने से शिवभक्ति बढ़ती है और अनेक रोग नष्ट होते हैं। यह रुद्राक्ष वृश्चिक और कन्या लग्न वालों के लिए उपयोगी है।

उपयोग से लाभ

वैदिक ऋषियों का यह मत है कि इसको पहनने से मन को शांति मिलती है। उसका मुख्य कारण यह है कि यह शरीर की गर्मी को अपने में खींचकर बाहर फेंकता है।
यदि दोमुखी रुद्राक्ष की भस्म को स्वर्णमाच्छिक भस्म के साथ बराबर की मात्रा में एक रत्ती सुबह-शाम हाई ब्लडप्रेशर के रोगी को दूध या दही अथवा मलाई के साथ दिया जाए तो चमत्कारी प्रभाव दिखलाता है।
मसूरिका नामक दुर्दम्य रोग का नाश करने के लिए तीन दिन तक बासी जल के अनुपात से रुद्राक्ष एवं काली मिर्च समभाग एक मासे से तीन मासे तक सेवन कराने से मसूरिका रोग समूल नष्ट हो जाता है