पांच मुखी रुद्राक्ष

यह पंचमुखी ब्रह्मा का स्वरूप है इसके देवता कालाग्नि हैं इसके उपयोग से दुःख और दारिद्र नष्ट होता है। पुण्य का उदय होता है शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त होता है एवं यह पाप का नाशक है।

पंचवक्त्रः स्वयं रुद्रः कालाग्निर्नाम नामतः।।


पंचमुखी रुद्राक्ष स्वयं कालाग्नि नाम रुद्र का स्वरूप है, पर-स्त्री गमन करने से जो पाप बनता है तथा अभक्ष्य भक्षण करने से जो पाप लगता है वह सब पंचमुखी रुद्राक्ष के धारण करने से नष्ट हो जाते हैं। इसमें कोई संशय नहीं यह पंचतत्त्वों का प्रतीक है। अनेक औषध कार्य में इसका उपयोग होता है।
यह सर्वकल्याणाकारी, मंगलप्रदाता एवं आयुष्यवर्द्धक है। महामृत्युंजय इत्यादि अनुष्ठानों में इसका ही प्रयोग होता है। यह अभीष्ट सिद्धि प्रदाता है। यह सर्वत्र सहज सुलभ होने के कारण इसका महत्व कुछ काम हो गया है परंतु शास्त्रीय दृष्टि से इसका महत्त्व कम नहीं है। पांचमुखी रुद्राख मेष, धनु, मीन, लग्न के जातकों के लिए अत्यन्त उपयोगी माना गया है।

उपयोग से लाभ

पंचमुखी रुद्राक्ष की माला पर महामृत्युंजय का जप एवं गायत्री जप शीघ्र सिद्धि प्रदान करता है
पांचमुखी रुद्राक्ष की माला पर ऊँ नमः शिवाय का पांच लाख जप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है तथा इस मंत्र द्वारा किसी भी कार्य पूर्ति के लिए इस मंत्र द्वारा सफलता पायी जा सकती है।
पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करने से अभक्ष्य-भक्षण और पर स्त्री गमन जैसे- जघंन्य अपराध भी भगवान शिव द्वारा नष्ट होता है।