यह स्वयं भगवान शंकर का सर्वप्रिय रुद्राक्ष है यह हनुमान जी का स्वरूप है। यह 14 विद्या, 14 लोक, 14 मनु, का साक्षात् रूप है। इसे धारण या उपयोग करने से सभी पापों से छुटकारा मिलता है व समस्त व्याधियां शांत हो जाती है तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है।
चतुर्दशास्यो रुद्रास्यो रुद्राक्षो साक्षाद्देवो हनूमतः
धारयेन्मूध्नि यो नित्यं स याति परमं पदम्।।
चतुर्दशामुखी रुद्राक्ष हनुमान का स्वरूप है। जो मनुष्य नित्य प्रति अपने मस्तक पर धारण करते हैं वो परम पद को प्राप्त होते हैं। इस रुद्राक्ष के पहनने से शनि इत्यादि दोष की शांति होती है तथा तथा दुष्टजनों का नाश होता है। यह ’हनुमान रुद्राख’ नाम प्रसिद्ध है तथा सकल अभीष्ट सिद्धियों का दाता है।जो मनुष्य प्थ्वी पर रुद्राक्ष को मंत्र सहित धारण करते हैं वे रुद्रलोक में जाकर वास करते हैं तथा जो मंत्र रहित रुद्राक्ष धारण करते है वे घोर-नारक के भागी होते है।
उपयोग से लाभ
चर्तुमुखी रुद्राक्ष धारण करके हनुमान जी की उपासना करने पर परमपद की प्राप्ति होती हैयह रुद्राक्ष धारण करने से अरिष्ट शनि शान्ती होती है तथा दुष्ट शत्रुओं का नाश होता है।इस रुद्राक्ष की माला पर भगवान पुरुषोत्तम के मंत्रों का जप करने से वैकुण्ठ की प्राप्ती होती है तथा सदाचार भावना उत्पन्न होती है।इस रुद्राक्ष को विधि पूर्वक धारण करने से कारागार जाने का अवसर नहीं प्राप्त होता